असल ज़िन्दगी के फँसूंक वांगडू की कहानी.(Sonam Wangchuk Life story in Hindi)

दोस्तो आपने थ्री इडियट मूवी तो जरूर देखी होगी, इस मूवी में ‘फुंगसुक वांगड़ू’ का किरदार आमिर खान ने निभाया था। उनका यह किरदार असल जिंदगी के वैज्ञानिक ‘सोनम वांगचुक’ से प्रेरित था। तो आज हम आपको उन्ही की जिंदगी के कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों से रुबरु करवायेगे.
1.  सोनम वांगचुक जी का जन्म 1 सितम्बर 1966 में जम्मू और कश्मीर के लेह जिले के एक छोटे से गांव अलची में हुआ था. 
2.  आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वे सात साल तक स्कूल ही नही गए क्योकि इनके गांव में कोई स्कूल ही नही था, इनकी शुरुवाती पढ़ाई इनकी माता जी ने घर पर ही करवाई थी. 
3.  जब इन्होंने श्रीनगर में पढ़ना शुरू किया था, तो स्कूल की भाषा और इनकी मातृभाषा अलग होने की वजह से इन्हे बहुत ज़्यादा परेशानी का सामना करना पड़ा और इसी वजह से उन्हने अपनी आगे की पढ़ाई दिल्ली से की थी. 
4.  इनके पिता जी ‘सोनम वांगयल’ राजनेता थे, जो बाद में राज्य सरकार के मंत्री भी बने थे. 
5.  इनके पिता जी चाहते थे कि यह अपनी पढ़ाई ‘सिविल इंजीनियरिंग’ में पूरी करे, लेकिन ये इसके बावजूद भी अपने पिता जी की इच्छा के विरुद्ध गए और इन्होंने ‘मैकेनिकल इंजीनियरिंग’ ले लिया था. 
6.  इन्होने मात्र 21 साल की उम्र में अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पास कर ली थी. 
7.  जब इन्होंने अपनी डिग्री पास कर ली, तब इन्होंने एक चीज़ नोटिस करी की लद्दाख क्षेत्र के बच्चे  टैलेंटेड होने के बावजूद भी पिछड़े हुए है और इसका  सबसे बड़ा कारण यहां पर बोली जाने local language थी.  जो यंहा की किताबें थी यह हिंदी और इंग्लिश में थी। और इन्होंने सबसे पहले इन किताबो को ट्रांसलेट करना शुरू किया।
8.  लद्दाख में एक समय ऐसा था कि यंहा के 95% बच्चे ही 10वी पास कर पाते थे, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि 2011 में यहाँ ‘लिटरेसी रेट, बढ़कर 77.20% हो गया, इसी वजह से इन्हें ‘ट्रेंड सेटर’ भी कहा जाता है.
9. 1988 में ‘सोनम वांगचुक’ और उनके कुछ साथियों ने मिलकर एक अभियान खड़ा किया, जिसे ‘ स्टूडेंट एजुकेशनल एन्ड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख या सैकमौल के नाम से भी जाना जाता है.
10.  उनका यह अभियान ‘सर्व शिक्षा अभियान’ से          10 वर्ष पहले शुरू हो चुका था। 
11.  इनके स्कूल या सैकमौल के सेंटर्स में स्टूडेंट as a failure आते थे, मतलब यह खासकर फ़ैल हो चुके स्टूडेंट्स को ट्रैन करते है.

12.  भारत देश का यह पहला ऐसा स्कूल है जिसे बच्चे खुद चलाते है, यहां स्कूल में खेती बड़ी से लेकर,खाना बनाने तथा खाने के बाद खुद के बर्तन धोने का सारा काम स्कूली बचे खुद करते है, दूसरे शब्दों में कान्हे तो यंहा पर बच्चो को आत्मनिर्भर बनना सिखाया जाता है.
13.  ‘सैकमौल’ को international Terra awards से भी सम्मानित किया गया जो बेस्ट बिल्डिंग 2016 के लिए था.

14.  जनवरी 2014 में वांगचुक जी ने ‘आइस स्तूप’ नामक एक परियोजना शुरू की जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के सामने आने वाली जल समस्या का समाधान खोजना था. यह स्तूप ऐसे थे जिसमें 1,50,000 लीटर पानी स्टोर किया जा सकता था ताकि सर्दियों में बनाई गई स्तुपो की बर्फ जून तक बनी रहे और उस पानी को गर्मियों में इस्तेमाल किया जा सके. 
15.  उन्हें इन महान कार्यो के लिए कई पुरस्कारों से भी समानित किया गया। विशेष रूप से आईसीए ओनर अवार्ड 2017,जीक्यू मैन ऑफ दी ईयर ऐसे कई और पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया.
16. उन्होंने खुद एक इंटरव्यू के दौरान बताया है कि ‘ थ्री इडियट मूवी उनकी बायोग्राफी नही है बल्कि इस मूवी का किरदार ‘फुंगसुक वांगड़ू’ इनसे प्रेरित है.
हाल ही में इन्होंने एक वीडियो जारी किया है  जिसमे वे बताते है कि हम कैसे चीन की चीज़ों का बहिष्कार कर सकते है, ‘ सैनिक अपनी बुलेट से ओर आम नागरिक अपने वालेट से.

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