इसरो से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य (Amazing Facts about ISRO in Hindi)

Amazing Facts about ISRO in Hindi

Amazing Facts about ISRO in Hindi

ISRO (Indian space research organization) भारत की एक स्पेस एजेंसी है, जिसका प्रमुख काम धरती के बाहर अंतरिक्ष जो खुद में ही रहस्यों का खजाना समेटे है, उसके बारे में खोज करना तथा उससे सम्बंधित जानकारी जुटाना होता है. हमारा देश भारत एक विकासशील देश है, और इसे दुनिया में एक अलग पहचान दिलाने श्रेय ISRO को भी जाता है, जिसने समय-समय पर दुनिया को अपने असामान्य कार्यो से अचंभित किया है. इस पोस्ट में कुछ ऐसे इसरो से जुड़े कुछ आश्चर्यजनक तथ्य (Amazing Facts about ISRO in Hindi) जिन्हें जानकर आपको देश के इस महान संगठन पर जरुर गर्व होगा.       


1.  दोस्तो ‘इसरो’ की शुरुवात बड़े ही खास दिन को हुई थी यह दिन हम भारतवासियो के लिए गौरवपूर्ण होता है, ‘इसरो’ की शुरुआत 15 अगस्त 1960 को हुई थी.


2.  भारत देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जी के कार्यकाल 1962 में ‘INCOSPAR’ (The Indian National Committee For Space Research) की स्थापना की गई, 1969 में यह नाम बदलकर ‘ISRO’ कर दिया गया.


3.  ‘डॉ विक्रम साराभाई’ को भारतीय स्पेस एंजेंसी का जनक माना जाता है.

Vikram Sarabhai Amazing Facts about ISRO in Hindi


4.  ‘इसरो’ की स्थापना के महज 6 साल बाद ही भारत ने 19 अप्रैल 1975 को अपनी पहली सैटेलाइट लॉन्च की जिसका आर्यभट्ट रखा गया था, इस सैटेलाइट को रूस की सहायता से लांच किया गया था.


5.  7 जून 1979 को भारत मे बना पहला ‘प्रायोगिक रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट भास्कर 1 लॉन्च हुआ, यह एक पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट थी, और इस सैटेलाइट का वजन करीब 442 किलोग्राम था. इसका कक्षीय जीवन 10 साल का था, और इसमे ऑनबोर्ड टीवी कैमरा इमेजरी का उपयोग जल विज्ञान और वानिकी के क्षेत्र में किया जाता था. इस सैटलाइट ने हमे समुद्र और भूमि की जानकारी प्रदान की.


6.  साल 1981 में ‘इसरो’ ने एप्पल सैटेलाइट को लांच किया गया, उस समय संसाधनों की पूर्ति न होने के कारण इस सैटेलाइट को ले जाने के बैलगाड़ी की मदद ली गई.


7.  SLV 3 भारत देश का पहला विदेशी ‘सैटेलाइट लॉन्च वेहिकल’ था, इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम साहब ने किया था.


8.  ‘इसरो’ ने 22 अक्टूबर 2008 को अपना पहला चंद्रयान मिशन 1 लॉन्च किया जिसका बजट करीब 396 करोड़ था, जो ‘नासा’ के एक साल के बजट से 9 गुना कम था, इसी चन्द्रयान मिशन के द्वारा चांद पर पानी की खोज हुई थी.


9.  दोस्तो आप यह जानकर दंग रह जाओगे की ‘इसरो’ के पिछले 40 साल का खर्चा ‘नासा’ के एक साल के खर्च के लगभग आधा है.


10.  ‘इसरो’ का बजट वर्तमान में देश के कुल बजट का मात्र 0.34% है, जबकि भारत की GDP में इसका 0.8% योगदान है. 


11.  ‘इसरो’ ने अब तक 21 देशों के लिये 71 सैटेलाइट लांच की है, जिससे देश को करीब 700 करोड़ रुपये की कमाई हुई.


12.  ‘इसरो’ अपने अंतरिक्ष अभियानों पर काफी रुपया खर्च करता है, अगर आप ऐसा सोच रहे है की ‘इसरो’ के पास टेक्नोलॉजी की कमी है तो यह बात सही नही है, बल्कि हमारी स्पेस एंजेंसी के पास दुनिया के बेस्ट दिमागों का जमावड़ा है जिन्होंने ऐसी तकनीक बनाई है, जिसमे कम पैसा लगता है.

 
13.  ‘इसरो’ की सबसे बड़ी खूबी है कि यह  कम खर्चे पर प्रोजेक्ट तैयार करके देता है. इसी कारण विश्व के बहुत से देश व कम्पनीज़ ‘नासा’ को छोड़कर अपनी सैटेलाइट लांच करने के लिये भारत के पास आ रहे है. जो भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा है, ‘इसरो’ का टर्नओवर भी 14 बिलियन है.


14.  ‘इसरो’ का सालाना बजट करीब 11500 करोड रुपये है, जोकि ‘नासा’ की तुलना में बेहद कम है.


15.  ‘इसरो’ का नाम दुनिया की 6 सबसे बेस्ट स्पेस एंजेंसिस में शुमार हो चुका है.


16.  दोस्तो ‘इसरो’ ऐसे ही आज इस मुकाम पर नही पहुंचा, बल्कि उसे यह मुकाम हासिल करने के लिये काफी मशक्तों का सामना करना पड़ा है. जब भारतीय वैज्ञानिकों ने अपना राकेट लांच किया था, तो भारतीय वैज्ञानिक तिरुवनंतपुरम से बसों में आते थे और रेलवे स्टेशन पर ही खाना खाते थे, जब राकेट को लांच करने का समय आया तो संसाधनों की कमी होने के कारण राकेट के कुछ हिस्सों को साईकल पर ले जाया गया था.


17.  जब विश्व के बहुत से देश नेविगेशनल पर्पज के लिये अमेरिका के GPS पर निर्भर हुआ करते थे, तब ‘इसरो’ ने सबको चौकाते हुए अपना नेविगेशन सैटेलाइट, IRNSS लांच कर चुका था.


18.  ‘इसरो’ की कमर्शियल डिवीजन ‘ANTRIX’ है जो हमारी स्पेस तकनीक को दूसरे देशों तक पहुँचाती है.


19.  ‘ANTRIX’  के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर रत्न टाटा और जमशेद गोदरेज है.


20.  दोस्तो जंहा हमारे भारत में 4G ईंटरनेट भी रुक रुक कर चलता है, वहीं आपको आश्चर्य होगा कि ‘इसरो’ की इंटरनेट स्पीड 2GB per/सेकंड है और ‘नासा’ की इंटरनेट स्पीड 91Gb per/सेकंड है.


21.  भारत दुनिया के उन देशों में शुमार है जो अपनी ही धरती पर सैटेलाइट बनाने व लांच करने की क्षमता रखते है.


22.  ‘इसरो’ ने गूगल अर्थ का देसी वर्जन भुवन बनाया है, यह वेब आधारित 3D सैटेलाइट इमेजलरी टूल पर आधारित है.


23.  ‘इसरो’ का हेडक्वार्टर बेंगलुरु में स्थित है, भारत मे इसरो के 13 सेंटर्स है. जिसमे करीब 16072 वैज्ञानिक काम करते है.


24.  दोस्तो ‘इसरो’ के पास काम करने वाले सबसे अधिक बैचलर वैज्ञानिक है, जिन्होंने अपनी पुरी ज़िन्दगी ‘इसरो’ को समर्पित कर दी है और इनमे से हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम जी भी शामिल थे.


25.  ‘इसरो’ के वर्तमान चैयरमेन डॉ के. सिवान है, जिन्होंने जनवरी 2018 में यह पद ग्रहण किया था.


26.  दोस्तो हर एक देश की एक स्पेस एंजेंसी होती है वैसे ही पाकिस्तान की भी है जिसका नाम ‘SUPARCO’ है, इसकी शुरुआत ‘इसरो’ से करीब 8 साल पहले हुई थी. अगर दोनों की प्रौग्रेस की तुलना की जाए भारत पाकिस्तान से कोसो आगे खड़ा है. जंहा भारत अब तक अपनी 86 सैटेलाइट लॉन्च कर चुका है, वहीं पाकिस्तान ने केवल 2 ही सैटेलाइट लॉन्च की है.


27.  दोस्तो आपको हैरानी होगी कि ‘नासा’ में करीब 36% भारतीय वैज्ञानिक काम करते है। जिसमे कल्पना चावला, अश्विन वासुव्दा, शर्मिला भट्टाचार्य, सुनीता विल्लिमन्स जैसे जाने माने भारतीय है जो नासा में काम कर चुके है.


28.  ‘इसरो’ और ‘नासा’ के बजट में जमीन आसमान का अंतर है ‘नासा’ का बजट 20.7 मिलियन डॉलर है वहीं ‘इसरो’ का बजट 1.6 मिलियन डॉलर है, जो कि नासा से करीब 9 गुना कम है.


29.  दोस्तो बहुत साल पहले भारत ने अमेरिका से ‘मंगल मिशन’ के इंजिनयरिंग और टेक्नोलॉजी की मांग की थी पर अमेरिका ने साफ मना कर दिया था, पर भारतीय वैज्ञानिक निराश न होकर अपने काम को अंजाम देते रहे.


30.  भारत ने साल 2013 में सबको चौकाते हुए मंगलयान को सतिश धवन स्पेस सेंटर्स श्री हरिकोटा से लॉन्च किया और यह सितम्बर 2014 में मार्स पर पहुंच गया.


31.  भारत विश्व का पहला ऐसा देश बना जो मिशन मंगल पर अपने पहले ही प्रयास में सफल हुआ.


32.  यह मिशन करीब 450 करोड रुपये का था, जो दूसरे देशों के मुकाबले काफी किफायती है. अगर आपको यह भी ज्यादा लग रहा है, तो रिक्शा से 1km जाने में 10- 12 रुपये लगते है और वहीं दूसरी तरफ रॉकेट को इसरो ने 7-8 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से मंगल गृह पर पहुंचाया है. 


33.  अगर तुलना की जाए तो USA का मार्स मिशन 671 मिलियन डॉलर जबकि भारत का यह मिशन महज 74 मिलियन डॉलर था.


34.  भारत का मंगल मिशन हॉलीवुड की मूवी galaxy, star wars से भी ज्यादा सस्ता था.


35.  1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत को GPS से जुड़ा डाटा देने भी इंकार कर दिया था. इस डाटा की मदद से भारत पाकिस्तान के आंतकवादियो की स्थिति का पता लगा सकते थे, लेकिन बाद में इसरो ने इस तरह का टूल खुद विकसित कर लिया था.


36.  15 फरवरी 2017 को PSLV प्रक्षेपण के बाद भारत ने विश्व भर में अपनी एक अलग ही धाक जमाई है, जो काम बडे से बड़ा देश नही कर पाया वो भारत ने कर दिखाया. दरसल ‘इसरो’ ने PSLV रॉकेट की सहायता से 104 सैटेलाइट को एक साथ अंतरिक्ष मे भेजने का रिकॉड कायम किया. 104 सैटेलाइट में भारत के 3, अमरीका के 96 बाकी बचे इजरायल और कजाकिस्तान जैसे देशों के थे. भारत के इस कारनामे को दुनिया भर में काफी सराहा गया.

 
37.  ‘इसरो’ के सफल मिशनों में मंगलयान 1, चंद्रयान 1, cartosat और PSLV-C37 जैसे मिशन शामिल है.


38.  ‘इसरो’ का सबसे पावरफुल रॉकेट GSLV मार्क 3 है, इसका वज़न लगभग 4 टन के करीब है, यह रॉकेट 4 टन भार ट्रांसफर ऑर्बिट, तथा 7.5 टन भार लोअर अर्थ ऑर्बिट में लेकर जा सकता है.


39.  साल 2019 में भारत ने सबको चौकाते हुए चंद्रयान 2 लॉन्च किया. जो 22 जुलाई 2019 को 2 बजकर 51 मिनट पर श्री हरिकोटा सतिश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया गया. इस मिशन पर दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नजर रही, दरसल चंद्रयान 2 असल मे चंद्रयान मिशन की ही अगली कहानी है.

 
40.  दुर्भाग्यवश यह मिशन पूरी तरह से सफल नही रहा, पर भारत के इस प्रयास को दुनिया भर के देशों ने सराहा. दरसल हुआ ये था की भारत के मून लैंडर विक्रम का ‘इसरो’ से उस वक्त सम्पर्क टूट गया जब वह चन्द्रमा की सतह से महज 2km दूर था. पर भारत के प्रयासों की काफी दुनिया भर में काफ़ी सराहना हुई क्यूंकि इसरो ने इसके साथ लगे ऑर्बिटर को सफलतापूर्वक चाँद की कक्षा में स्थापित कर दिया था. 


41.  ‘इसरो’ ने आने वाले सालों में कई और मिशन तैयार करके रखे है, जिसमे मंगलयान 2, आदित्या 11, IVOM और शुक्रयान जैसे मिशन शामिल है.


42. दोस्तो फ़ेसबुक पर ISRO के नाम से एक पेज भी है, जिसे करीब 2443607 लोगो ने लाइक किया है. चाहे तो आप भी कर सकते देश के लिये.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *