तो बात 20वी शताब्दी की है, दुनिया वर्ल्ड वॉर 2 के बाद कोल्ड वॉर की परिस्थितियों से गुज़र रही थी। इसी बीच दोनों देशों USA और USSR के बीच स्पेस रेस शुरू हो गयी, जिसमे शुरुआती सालों में USSR USA से काफी आगे था फिर चाहे वो दुनिया की पहली Successfully Launched Artificial Satellite हो या फिर पहला इंसानी स्पेस मिशन USSR हर तरीके से USA से काफी आगे था, पर उस समय के अमेरिका के President John F. Kennedy ने हार नही मानी। उनका सपना था, की 1970 से पहले वो दुनिया का पहला Manned Moon Missions लांच करेंगे। यही नही उन्होंने USSR के Government Head Nikita Sergeyevich Khrushchev को भी एक जॉइंट मून लैंडिंग मिशन का ऑफर दिया, जिसे उन्होंने रिजेक्ट कर दिया और John F. Kennedy की मौत के बाद जॉइंट मून लैंडिंग का आईडिया भी ख़त्म हो गया। लेकिन अमेरिकन स्पेस एजेंसी ने हार नही मानी और नवम्बर 1967 तक उन्होंने एक बहुत पॉवरफुल राकेट बनाया जिसका नाम Saturn V रखा गया। ये NASA का थ्री स्टेज और एक बहुत ही एडवांस और पॉवरफुल राकेट था, जिसे खासकर मून मिशन के लिए बनाया गया था। अब इस मिशन के लिए Main Crew Members की Selection Process शुरू हुई जिसमे मिशन कमांडर नील आर्मस्ट्रांग को बनाया गया, क्यूंकि वो इससे पहले नेवी में अपनी सेवाएं दे चुके थे और ऐसा भी माना जाता है की वो उस समय के सबसे बेहतरीन पायलट थे। इसी के साथ Command Module Pilot Michael Collins और Lunar Module Pilot Buzz Aldrin को चुना गया।


साइट सिलेक्शन




अब बारी थी साइट सिलेक्शन की मतलब चाँद के जिस हिसे पर उतरना था, उसका चुनाव किया जाना था। कुछ अमेरिकन Satellites को लॉच किया गया जिनका काम चाँद की तस्वीरे भेजने था। उसके बाद 5 जगहों को चुना गया जिनपर बहुत बारीक़ Research की गइ। रिसर्च का Main Objective एक ऐसी जगह ढूंढना था, जो समतल हो और जिसपर आसानी से लैंडिंग की जा सके, साथ में वंहा ऊँची पहाड़ियां और गहरे गड्ढे नही होने चाहिए थे, क्यूंकि उससे राडार के Signal पर फर्क पड़ता और लैंडिंग भी सही से नहीं हो पाती। अपोलो साइट सिलेक्शन बोर्ड ने साइट 2 को चुन लिया. जिसके साथ उन्हनोने साइट 3 और 5 को बैकअप के रूप में रख लिया जिसका प्रयोग वो किसी भी आपातकालीन स्थिति में कर सकते थे। मई 1969 को अपोलो 10 के लूनर मॉडल को भी साइट 2 के अन्दर 15 km तक उड़ाया गया जिसके बाद साइट 2 को Finalize कर लिया गया। आब इसपर फैसला होना था की आखिर कौन वो पहला शख्स होगा जो चाँद पर पहला कदम रखेग, इसके लिए काफी लंबा मीटिंग्स का दौर चला और अंत में नील आर्मस्ट्रांग का नाम Finalize कर लिया गया।


 लॉन्चिंग



अब Launch की घड़ी आ चुकी थी, लगभग 10 लाख लोगो ने लांच साइट की आस-पास की जगहों से इस ऐतिहासिक घटना को देखा। इसे 35 अलग-अलग देशों में लाइव टेलीकास्ट किया गया और लाइव देखने वालों में अकेले अमेरिका के 2 करोड़ 50 लाख से ज़्यादा लोग शामिल थे, USA के उस समय के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भी इसे लाइव टीवी पर अपने ऑफिस में बैठकर देखा था।


16 जुलाई 1969 को मिशन अपोलो 11 को Saturn V रॉकेट में कैनेडी स्पेस सेंटर से USA के समय अनुसार दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर launch किया गया। अब अपोलो 11 उड़ान भर चूका था, मानव इतिहास में ये पहली बार था जब कोई इंसान चाँद पर उतरने वाला था। करोड़ो लोगो की उम्मीदों को साथ में लेकर अपोलो 11 ने सभी स्टेजेस को पार कर लिया और अब वो चाँद की तरफ बढ़ रहा था।


प्रमुख कार्य


पृथ्वी छोड़ने के 2 घंटे बाद Passenger Module Main Rocket से अलग हो गया।अब Passenger Module के दो हिस्से थे, Apollo Command and Module का नाम Columbia और Apollo Lunar module  का ईगल रखा गया, 3 दिन बाद पूरी टीम लूनर ऑर्बिट यानि चन्द्रमा की कक्षा में पहुंच गइ, उसके एक दिन बाद ईगल ने खुदको कोलंबिया से अलग कर लिया। ईगल में नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन मौजूद थे और कोलंबिया का काम मून को ऑर्बिट करना था, जिसे माइकल कॉलिन्स ऑपरेट कर रहे थे। अब ईगल चाँद पर उतरने ही वाला था की कंप्यूटर ने अचानक से खतरे के संकेत देना शुरू कर दिया, स्थिति को देखते हुए नील आर्मस्ट्रांग ने ईगल का पूरा कंट्रोल अपने हाथों में ले लिया और उन्होंने सफलतापूर्वक ईगल को चाँद पर उतार लिया। यंहा सबसे ज़्यादा भयानक बात यह थी की लैंडिंग के बाद उनके पास सिर्फ 25 सेकण्ड्स का फ्यूल बचा था, अगर नील आर्मस्ट्रांग सही समय पर निर्णय न लेते तो शायद ये मिशन कभी सफल नही हो पाता। 
जुलाई 20 1969, नील आर्मस्ट्रांग पहले इंसान बने जिन्होंने चाँद पर पहला कदम रखा और उनके कुछ पहले शब्द थे, "मानव के लिए ये एक छोटा कदम है, लेकिंग मानवता के लिए ये एक लम्बी छलांग है।"



अगले 2:30 घंटे उन दोनों ने चाँद की सतह पर चाँद की मिटटी और पत्थर इकठा किये, बहुत सारे नोट्स बनाए और कई एक्सपेरिमेंट्स किये। इस महान लैंडिंग को पृथ्वी पर उस समय लगभग 60 करोड़ लोगो ने देखा था। दोनों ने चाँद पर अमेरिकन फ्लैग को लगाया और बहुत से फोटोग्राफ्स लेने के बाद अमेरिकन प्रेसीडेंट रिचर्ड निक्सन से भी बात की।



                 वापसी


अपना सारा काम निपटाने के बाद ईगल ने उड़ान भरी और कोलंबिया से कनेक्ट हो गया अब तीनों वैज्ञानिक अपना पूरा मिशन ख़त्म कर चुके थे और उन्होंने वापसी की उड़ान भरी। 24 जुलाई 1969 को उत्तरी प्रशांत महासागर में कोलंबिया ने लैंडिंग की, लैंडिंग के तुरंत बाद वैज्ञानिकों ने Flotation बैग को एक्टिवेट कर दिया और उन्हें एयर फ़ोर्स और नेवी  की मदत से रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद उन्हें सुरक्षा कारणों के चलते 3 हफ्तों तक क्वारंटाइन किया गया जिससे अगर कोई विषाणु उनके साथ आ गए हो तो उन्हें फैलने से रोका जा सके। इस पुरे ऐतिहासिक मिशन की सफलता के बाद वो तीनो महान वैज्ञानिक दुनिया भर में काफी मशहूर हो गए, उन्हें बहुत से पुरुस्कारो से भी नवाज़ा  गया और दुनियाभर में शांति का सन्देश देने के लिए उन्होंने कई देशों की यात्रा की।

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