Maruti 800 facts in Hindi| मारुती 800 से जुड़े कुछ दिलचस्प व मजेदार तथ्य

Maruti 800 facts in Hindi: दोस्तों आज हम बात करने वाले है भारत की सबसे मशहूर कार मारुती 800 की. मारुती 800 भारत की सबसे लोकप्रिय कार रही है, अधिकतर लोगों ने इसी गाड़ी से ड्राइविंग करना सीखा है. सर्दियों में तो कई बार यह गाड़ी धका देने पर ही स्टार्ट होती थी, इस गाड़ी से आपकी और हमारी कोई न कोई याद जरूर जुड़ी होगी. आइये तो जानते है Maruti 800 facts in Hindi (मारुती 800 से जुड़े कुछ दिलचस्प व मजेदार तथ्य)

Maruti 800 facts in Hindi
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Maruti 800 facts in Hindi

दोस्तों इस कम्पनी की नीव 16 नवम्बर 1970 को रखी गयी थी. उस वक्त इस कम्पनी का नाम ‘Ram Maruti Technical Service Private Ltd.’ हुआ करता था. यह कम्पनी अपने शुरुआती समय मे गाड़िया नही बनाती थी, बल्कि यह स्वदेशी कारो के पुर्जो को एकत्रित करना, डिज़ाइन तैयार करने से सम्बंधित जानकारी उपलब्ध करवाती थी. हालांकि उस समय लोगो के पास भी इतना वक्त नही होता था कि वह गाड़ियों से सम्बंधित जानकारी ले. जिस वजह से यह कम्पनी घाटे में जा रही थी,

 70 के दशक में इस कार का सपना संजय गांधी जी ने देखा था. उन्हें इस कम्पनी के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर भी तैनात किया था. हालांकि उन्हें गाडीयो से सम्बंधित उनके डिज़ाइन से लेकर पुर्जो तक उनका कोई ज्ञान नही था. दुर्भाग्यवश 1980 में प्लेन दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गयी, लेकिन उनका यह सपना जीवित रहा जोकि इनकी मृत्यु के 3 साल बाद पूरा हुआ. 


1970 में उस समय हिंदुस्तान अम्बेसेडर और प्रीमियर पदमिनी जैसी कारे सड़को पर दौड़ती हुई नज़र आती थी, हालांकि यह आम आदमियों की पहुंच से काफी दूर थी. साल 1971 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने इस गाड़ी का प्रस्ताव रखा था. वे चाहती थी, कि एक ऐसी गाड़ी का निर्माण किया जाए जिसे अमीर से अमीर व मध्यवर्गीय परिवार भी खरीद सकता हो.

 जून 1971 में कम्पनी एक्ट के मुताबिक कम्पनी का नाम बदलकर ‘मारुति लिमिटेड’ रख दिया गया. साल 1977 को इस कम्पनी की कमान डॉ वैकटम कृष्णमूर्ति जी को सौंपी गई. जोकि ‘Bharat Heavy Electric Limited’ के चैयरमेन और सीईओ भी रह चुके थे , इसके अलावा यह IIT Delhi के भी चैयरमेन भी रह चुके थे. इसी साल 1977 को इस कम्पनी का नाम ‘मारुति लिमिटेड’ से हटाकर ‘मारुति उद्योग’ रख दिया गया.

 1982 को मारुति ने जापान की SUZUKI कम्पनी के साथ पार्टनरशिप कर ली और इस दरमियाँ इन्होंने एक ‘जॉइंट अग्रीमेंट’ पर भी हस्ताक्षर किये. इसके बाद लोग इस कम्पनी को ‘MARUTI SUZUKI’ के नाम से जानने लगे ‘MARUTI SUZUKI’ के लिये यह सफ़र इतना आसान नही था, यह कम्पनी शुरुआत में जापान से गाड़ियों को आयात करके भारत मे बेचा करती थी लेकिन यह गाड़िया बहुत महंगी हुआ करती थी, जो भारत के लोगो के बजट से काफी बाहर थी. हालांकि उस समय भारत की मार्केट कार के मामले में ज्यादा बड़ी नही थी.

1983 में इस कम्पनी ने जापान की किसी कार को कॉपी करके MARUTI SUZUKI 800 बनाई. मारुति 800 को 1983 में पहली बार बाज़ार में उतारा गया. जिसकी कीमत 48000 से 52500 रुपए के बीच मे रखी गई. मारुति 800 उस दौर की सबसे सस्ती कारो में से एक थी, जिसे लोग हाथों हाथ खरीद रहे थे. इसे कोई आम आदमी भी खरीद सकता था. 

आपको बता दे कि मारुति 800 पहली ऐसी कार थी जो स्पीडोमीटर पर दी गयी स्पीड से भी ऊपर चलती थी दरसल स्पीडोमीटर पर इसकी टॉप स्पीड 140 km/ प्रति घण्टा दी गयी थी, लेकिन इसकी टॉप स्पीड 144km/प्रति घण्टा रिकॉर्ड की गई है. मारुति 800 में 37 horse power, 800cc का इंजन था. जोकि 59mm टॉर्क उत्पन्न करता था.

Maruti 800 facts in Hindi

 इस कार के पहले ग्राहक इंडियन एयरलाइन के कर्मचारी ‘हरपाल सिंह’ जी थे. उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने इस कार की चाबी इन्हें खुद सौंपी थी. जिसका नम्बर DIA 6479 था, उस समय इसकी कीमत 47500 रुपये थी. यह कार 2010 तक उनके पास ही रही इसके अलावा तो उन्होंने किसी दूसरी कार को देखा तक नही. 

Maruti 800 facts in Hindi
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मारुति 800 भारत की पहली फ्रंट व्हील ड्राइव कार थी जिससे इसकी लागत और वजन कम हो जो होता था. मारुति 800 उस समय सचिन तेंदुलकर और शाहरूख खान जैसे सितारो के पास भी हुआ करती थी और यंहा तक की यह कार आज भी सचिन तेंदुलकर के गैराज में खड़ी है और उनकी पसंदीदा मानी जाती है.


मारुति 800 की डिमांड दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी. कई बार तो लोगो को गाड़ी बुक कराने के बाद 1-2 साल भी इंतजार करना पड़ता था. 1997 में सड़कों पर मारुति 800 ही दौड़ती हुई नजर आती थी, उस समय 10 मे से 8 लोगो के पास मारुति 800 ही होती थी. इस कार की उस समय इतनी डिमांड थी कि 1700 रोबोट की मदद से हर 12 सेकिंड में 1 कार बनकर तैयार हो जाती थी और यंहा तक की दुसरे देशों में भी इसकी काफी डिमांड थी. ‘MARUTI SUZUKI’ कंपनी के शुरू होने के महज दो साल बाद कारो की बिक्री 40,000 से 1,00,000 हो गयी थी. हालांकि इसके बाद इस कम्पनी ने जिप्सी, जैन, बलेनो, वेगनआर जैसी कारे भी मार्केट में उतारी.


मारुति 800 सेफ्टी के मामले में थोड़ी पिछड़ी हुई नजर हुई नज़र आती है, दोस्तो आपको आश्चर्य होगा कि जब मारुति 800 लॉन्च हुई तो इसमें सीट बेल्ट तक नही थी. हर साल कार एक्सीडेंट में मरने वालों का आंकड़ा 3,00,000 तक पहुंच गया था क्योंकि उस समय अधिकतर लोगो की पसंद यही कार थी. 


आपको हैरानी होगी कि पाकिस्तान में सबसे अधिक चोरी होने वाली कार भी मारुति 800 थी. वँहा पर चोरो को अधिकतर सफेद रंग की मारुति ही पसन्द आती थी. ये अटपटा जरूर है पर सच है.

भारत मे आम आदमियों की जरूरत को समझते हुए ऑटोमोबाइल कम्पनियो ने 37 सालो का सफर तय कर लिया है. इस कम्पनी ने 2012 तक 10000000 कारो को बेचने का एक अनोखा रिकॉर्ड कायम किया है. ‘MARUTI SUZUKI’ ने 18 जनवरी 2013 शिलॉन्ग के एक ग्राहक के लिए एक आखिरी मारुति बनाई. साल 2014 से इस कार का प्रोडक्शन पुरी तरह से बंद कर दिया गया है हालांकि इस कार के पुर्जे अगले 10-15 सालो तक मिलते रहेंगे. मारुति 800 ने अपने अंतिम दौर में नई नई आधुनिक कारो का डटकर मुकाबला किया है, 2013 में भी मारुति 800 की 26754 कारों की बिक्री हुई थी. MARUTI 800 ने लाखों करोड़ों मध्यवर्गीय परिवारों का कार लेने का सपना साकार किया है.

Maruti 800 facts in Hindi
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तो मित्रों यह थी Maruti 800 facts in Hindi मारुती 800 से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें व मजेदार बातें, यदि आपको इन्हें जानकर अच्छा लगा तो इस पोस्ट को अपने लोगों के साथ जरुर शेयर करे और कमेंट करके अपने विचार बताएं और आप हमे ऐसे ही दिलचस्प व मजेदार तथ्य के लिए Instagram पर भी फॉलो कर सकते है .

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